हर्ष मंदेर यांचे भाषण चिथावणीखोर नाही

हर्ष मंदेर यांचे भाषण चिथावणीखोर नाही

भाजपचे नेते कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकूर, प्रवेश वर्मा यांच्या चिथावणीखोर भाषणांमुळे दिल्लीत दंगल भडकली होती आणि या नेत्यांच्याविरोधात दिल्ली पोलिसांनी तत्काळ फिर्याद दाखल करावी, यासाठी एक याचिका सामाजिक कार्यकर्ते हर्ष मंदेर यांनी दाखल केली होती.

या याचिकेवर गेल्या बुधवारी सर्वोच्च न्यायालयात सुनावणी होत असताना सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता यांनी, १६ डिसेंबर २०१९ रोजी जामिया मिलिया इस्लामिया विद्यापीठात सीएएविरोधी आंदोलनात हर्ष मंदर यांनी केलेले एक वक्तव्य न्यायालयाला सांगितले. या वक्तव्यात हर्ष मंदर यांनी आमचा सर्वोच्च न्यायालयावर विश्वास राहिलेला नाही पण आपल्यापुढे पर्याय नसल्याने तिकडे जावे लागेल. मात्र आपल्याला खरा न्याय रस्त्यावर मिळेल, असे म्हटल्याचा एक निवडक भाग तुषार मेहता यांनी वाचून दाखवला होता आणि या मंदेर यांच्या विधानामुळे हिसा पसरू शकते असे म्हटले होते.

सर्वोच्च न्यायालयात शुक्रवारी तुषार मेहता यांच्या तक्रारीवरून सुनावणी झाली. यात सर्वोच्च न्यायालयाने दिल्ली पोलिसांच्या प्रतिज्ञापत्राला उत्तर देणारे एक पत्र न्यायालयाला सादर करावे असे हर्ष मंदेर यांना सांगितले. दिल्ली पोलिसांनी मंदेर यांच्याविरोधात चिथावणीखोर भाषण केले म्हणून एक प्रतिज्ञापत्र न्यायालयात सादर केले आहे. त्यावर मंदेर यांची बाजू काय आहे यासाठी हे पत्र असणार आहे.

त्याशिवाय शुक्रवारी सर्वोच्च न्यायालयाने न्यायालयाचा अवमान झाल्याची नोटीसही पाठवलेली नाही.

दरम्यान, सरकारतर्फे तुषार मेहता यांनी मंदेर यांचा आणखी एक व्हीडिओ न्यायालयात सादर केला आहे. त्यावर पुढील सुनावणी १५ मार्चला केली जाणार आहे.

मंदेर यांचे वकील दुष्यंत दवे यांनी, जामियातील मंदेर यांचे भाषण न्यायालयाचा कोणताही अवमान करणारे नव्हते असे सांगितले.

वास्तविक सॉलिसीटर तुषार मेहता यांचा हा दावा खरा नाही कारण जर हर्ष मंदेर यांचे जामियात झालेले एकूण भाषण ऐकल्यास त्यात त्यांनी मत्सर नव्हे तर प्रेमाने जिंकता येते असे म्हटले आहे.

हर्ष मंदेर यांनी हिंदीमध्ये भाषण केले होते. ते नेमके काय भाषण केले आहे, ते पुढील प्रमाणे …

सबसे पहले एक नारा उठाऊंगा कि लड़ाई किसके लिए है और किसलिए है? यह लड़ाई हमारे देश के लिए है, फिर हमारे संविधान के लिए है और इसके बाद यह लड़ाई मोहब्बत के लिए है.

इस सरकार ने ललकार और जंग छेड़ी है न सिर्फ इस देश के मुसलमान भाइयों और बहनों के खिलाफ, उन्होंने जंग छेड़ी है इस पूरे देश के खिलाफ.

मुल्क की आजादी की लड़ाई के दौरान हमारा तसव्वुर था कि हम अंग्रेजों के जाने के बाद किस तरह का देश बनाएंगे और हमारी यह कल्पना थी, यह विश्वास था कि हम एक ऐसा देश बनाएंगे जहां कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि आप इस भगवान को मानें या उस अल्लाह को मानें या किसी को न मानें.

कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि आप इस जाति के हो या वह भाषा बोलते हो, आप गरीब हो या अमीर, औरत हो या मर्द, आप हर तरह से बराबर के इंसान हों, इस देश के बराबर के नागरिक हों. इस देश पर आपका उतना ही हक है जितना किसी और का.

अब इस देश में मुसलमानों से सवाल पूछा जा रहा है कि आप अपने देश के प्रति अपनी मोहब्बत को साबित करें.

सवाल यह है कि पहले तो वह लोग यह सवाल पूछ रहे हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में कभी भी हिस्सा नहीं लिया, कोई कुर्बानी नहीं दी.

मुसलमान भाई बहन और जो मेरे बच्चे हैं, आप लोग इंडियन बाई चॉइस हैं, हम बाकी लोग इंडियन बाय चांस है. हमारे पास कोई चॉइस नहीं थी. हमारे लिए यही एक देश था. उन लोगों के पास चॉइस थी और आपके पूर्वजों ने यह देश चुना.

आज जो सरकार में हैं, वो साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि जिन्ना सही थे और महात्मा गांधी गलत थे.

उनकी पार्टी का नाम भारतीय जनता पार्टी से बदलकर भारतीय जिन्ना पार्टी बनाना चाहिए क्योंकि जिन्ना साहब ने कहा था कि यह हिंदुस्तान एक देश नहीं है, दो देश हैं मुस्लिम का पाकिस्तान और हिंदू हिंदुस्तान.

हम यह कहते हैं कि यह एक ही देश है हिंदुस्तान और इस देश पर इस देश के मुसलमान, हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, नास्तिक, आदिवासी, दलित, अमीर, गरीबमहिला, पुरुष सबको हर तरह से बराबर का हक है.

और जो आपसे सवाल पूछता है और आपका हक़ वापस लेने का दावा करता, तो उनके विरोध में इस देश में जो सैलाब उठा है, यह अपने देश के संविधान और संविधान की आत्मा, जो मोहब्बत है और बंधुता है उसको बचाने के लिए उठा है.

इसे बचाने के लिए हम लोग सब सड़क पर निकले हैं और निकलते रहेंगे. देखिए, यह लड़ाई संसद में नहीं जीती जाएगी क्योंकि हमारे जो राजनीतिक दल हैं, जो खुद को सेकुलर कहते हैं, उनमें लड़ने के लिए उस तरह का नैतिक साहस हीनहीं रहा है.

यह लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में भी नहीं जीती जाएगी क्योंकि हमने सुप्रीम कोर्ट को देखा है. पिछले कुछ वक्त से एनआरसी के मामले में, अयोध्या के मामले में और कश्मीर के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने इंसानियत, समानता और सेकुलरिज्म की रक्षा नहीं की.

पर हम कोशिश जरूर करेंगे क्योंकि वह हमारा सुप्रीम कोर्ट है. लेकिन फैसला न संसद न सुप्रीम कोर्ट में होगा

इस देश का क्या भविष्य होगा, आर नौजवान हैंआप अपने बच्चों को यह देश कैसा देना चाहते हैं, यह फैसला कहां होगा?

सड़कों पर होगा. हम सब लोग सड़कों पर निकले हैं. लेकिन सड़कों से भी बढ़ के इसका फैसला होगा. कहां होगा? अपने दिलों में, आपके और मेरे दिलों में.

और अगर वे नफरत भरना चाहते हैं और अगर हम उसका जवाब नफरत से ही देंगे, तो नफरत ही गहरी होगी.

अगर देश में कोई अंधेरा कर रहा है और हम कहें कि हम और अंधेरा करेंगे लड़ने के लिए, अंधेरा तो और गहरा ही होगा.

अगर अंधेरा है तो उसका सामना सिर्फ चिराग जलाना है और पूरी बड़ी आंधी है और उसी में हम अपना चिराग जलाएंगे. उसी से ये अंधेरा ख़त्म होगा.

उनकी नफरत का जवाब हमारे पास एक ही है और वो है मोहब्बत. वो हिंसा करेंगे और हमें हिंसा के लिए भड़काएंगे, पर हम हिंसा कभी न करें.

आप समझिये कि उनकी साज़िश है कि आपको हिंसा के लिए भड़काएंगे, हम भड़केंगे. हम 2% हिंसा करेंगे, वो 100% का जवाब देंगे.

गांधी जी से हमने सीखा है कि हिंसा और नाइंसाफी का जवाब अहिंसा से लड़ना है. कभी भी किसी को भी हिंसा और नफरत के लिए जो कोई भड़काए, वो आपका साथी नहीं है.

मैं एक नारा दूंगा संविधान जिंदाबाद, मोहब्बत जिंदाबाद.

मूळ बातमी

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